
स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों का जब भी नाम आता है उसमें शहीद राजा राव बक्स सिंह का नाम ज़रूर आता है। उन्नाव ज़िले के बैसवारा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले राजा राव बक्स के नाम से अंग्रेजी हुकूमत कांपती थी। जिनके इरादों को राजा राव ने चकनाचूर कर दिया। ब्रिटिश शासकों ने राजा राव को फांसी कि सजा दी थी। इतना ही नहीं फांसी देने के दौरान दो बार रस्सी भी टूटी।
बैसवारा क्षेत्र के डौडियाखेड़ा में जन्मे राजा राव ने वर्ष 1857 में हुई क्रांति में अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया था। जब उन्होने राजपाठ संभाला था। उस समय अंग्रेज़ शासक अपने राज्य का विस्तार कर रहे थे । ऐसे में राजा राव ने अंग्रेजों से लोहा लिया। लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, कानपुर के हजारों किसानों, युवाओं व मजदूरों को जोड़कर क्रांति की ऐसी मशाल जलाई की अंग्रेजों के छक्के छूट गए। जिसमें कानपुर, झाँसी, लखनऊ के राजाओं ने मिलकर एक साथ अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फ़ूका था। स्वाधीनता के लिए छेड़े गए संग्राम के लिए रानी लक्ष्मीबाई, बहादुर शाहजफर, नाना साहब, तात्या टोपे के साथ राजा राव भी शामिल हो गए थे।
31 मई 1857 को एक साथ अंग्रेजों की छावनी में हमला करना था। हमला कर पाते उससे पहले ही एक विस्फोट होने से अंग्रेज़ सतर्क हो गए। कानपुर में नाना साहब के अधिकार के बाद अंग्रेज़ वहां से भागकर उन्नाव के बक्सर आ गए जहां उनका सामना राजा राव से हुआ। बक्सर में अंग्रेज़ गंगा नदी के किनारे स्थित ढिल्लेश्वर शिव मंदिर में छुप गए। मौके पर मौजूद ठाकुर यदुनाथ सिंह ने अंग्रेजों को मंदिर से बाहर आने के लिए कहा लेकिन अंग्रेजों ने यदुनाथ सिंह को गोली मार दी। जिससे गुस्साई भीड़ ने मंदिर में आग लगा दी उस आग में अंग्रेज़ जलकर मर गए। इस हादसे में तीन अंग्रेज़ बच गए थे जिन्होने गंगा में कूदकर अपनी जान बचाई थी। उन्होने लखनऊ पहुंच कर पूरी बात अधिकारियों को बताई। जहां अंग्रेजों ने भारी फौज के साथ राजा राव के किले पर हमला बोल दिया। राजा राव ने अंग्रेजों का बहादुरी के साथ मुक़ाबला किया लेकिन अंग्रेजों के गोला बारूद के सामने से उन्हे हटना पड़ा।
राजा राव व उनके जवान छिप छिप कर अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध कर उनके दंभ को चकनाचूर करने का काम किया। कुछ गद्दारों ने मुखबरी करते हुए राव साहब के ठिकानों की जानकारी अंग्रेजों को देदी। अंग्रेजों ने राजा राव को काशी से गिरफ्तार कर लिया।


