
उत्तराखंड के बदियाकोट में आग से मंदिर को भारी नुकसान
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित मां भगवती मंदिर में भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। नवरात्रि के दौरान हुई इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। आग की चपेट में आने से लकड़ी से बने मंदिर के मुख्य ढांचे और उसकी खूबसूरत काष्ठकला को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है।
मंदिर में आग की ऊंची लपटें उठती देख एक ग्रामीण ने घटना का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मंदिर में आग लगने की खबर से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में चिंता का माहौल है।
बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर अपनी पारंपरिक वास्तुकला और लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। आग की वजह से मंदिर की इस ऐतिहासिक और कलात्मक पहचान को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
नवरात्रि के छठे दिन लगी भीषण आग
जानकारी के मुताबिक, यह घटना नवरात्रि के छठे दिन सुबह के समय हुई। मंदिर बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित बताया जाता है। लकड़ी से बने मंदिर में आग तेजी से फैल गई और इसकी लपटें दूर से दिखाई देने लगीं।
पहाड़ी क्षेत्र में मंदिर की स्थिति और अग्निशमन सुविधाओं तक पहुंच की चुनौतियों के कारण आग बुझाने में देरी होने की बात कही जा रही है। हालांकि, आग पर काबू पाने और नुकसान की वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है।
मंदिर का पंडाल और लकड़ी की नक्काशी भी जली
आग की चपेट में मंदिर परिसर में बना पंडाल भी आ गया। बताया जा रहा है कि आग से मंदिर के मुख्य हिस्से और लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी को नुकसान पहुंचा है।
प्रारंभिक चर्चाओं में पूजा के दौरान जलाए गए दीपक या शॉर्ट सर्किट को आग की संभावित वजह बताया जा रहा है। हालांकि, आग कैसे लगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना के वास्तविक कारण का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
नवरात्रि के दौरान हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों को दुखी कर दिया है। श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक महत्व रखने वाले इस मंदिर को हुए नुकसान से क्षेत्र में चिंता का माहौल है।
मां भगवती मंदिर का क्या है धार्मिक महत्व?
बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर दानपुर घाटी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का संबंध देवी भगवती और दैत्य निशुंभ के वध की कथा से जोड़ा जाता है। इसी मान्यता के आधार पर इस क्षेत्र के नाम की उत्पत्ति को लेकर भी स्थानीय परंपराएं प्रचलित हैं।
मंदिर में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूसरे क्षेत्रों से भी लोग दर्शन के लिए आते हैं। यहां आयोजित होने वाले पारंपरिक मेले और धार्मिक आयोजन भी इसकी पहचान का हिस्सा हैं।
मंदिर में आग लगने की घटना से स्थानीय लोगों के बीच शोक और चिंता का माहौल है। फिलहाल, घटना के कारणों, नुकसान के आधिकारिक आकलन और मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर पुष्टि की गई जानकारी सामने आना बाकी है।


