
महाकुंभ की तैयारियो की समीक्षा के लिए प्रयागराज आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों का अहवाहन किया कि सनातन परंपरा से परतंत्रता के प्रतीक व नाम हटने चाहिए। उनका संकेत कुम्भ व महाकुंभ के दौरान विभिन्न अखाड़ों के शाही स्नान व पेशवाई जैसे उर्दू शब्दों को बदलने की ओर था। मुख्यमंत्री ने संतों की भावनाओं के अनुरूप महाकुंभ के दौरान उसकी शास्त्रीय सीमा में मांस-मदिरा की बिक्री पर रोक की घोषणा की।
परेड मैदान में मुख्यमंत्री और 13 अखाड़ों, दंडी सन्यासी, आचार्यबाड़ा, खाकचौक व प्रयागवाल के प्रतिनिधियों के साथ संवाद में आखाडा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रवीन्द्र पुरी व महामंत्री महंत हरि गिरि ने एक दिन पूर्व आखाडा परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव से भी अवगत कराया। इसमें उक्त उर्दू शब्दों के स्थान पर हिन्दी-संस्कृतनिष्ठ शब्दों के प्रयोग का प्रस्ताव भी पारित था।
योगी ने कहा महाकुंभ आने वाले हर संत व श्रद्धालु को अविरल-निर्मल गंगा-यमुना के दर्शन होंगे। पवित्र नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए सरकार के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन साधू संत समाज का सहयोग भी अपेक्षित है।
ब्रह्मलीन संतों के लिए भूमि
मुख्यमंत्री योगी ने यह भी कहा कि महाकुंभ के दौरान ब्रह्मलीन होने वाले साधु-संतों की समाधि के लिए प्रयागराज में शीघ्र ही भूमि आरक्षित कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों के मार्गदर्शन में ही सनातन समाज का उत्कर्ष संभव है। महाकुंभ 2025, कुंभ 2019 से भी अधिक भव्य हो, इसके लिए सभी को योगदान करना होगा। उन्होंने कहा कि संतों की कृपा और प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में आज अयोध्या, वाराणसी और ब्रजधाम के नए स्वरूप का दर्शन पूरी दुनिया कर रही है।
हर आश्रम में गोसेवा
योगी ने कहा कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सामान्य लोगों को भी गोसेवा से जोड़ा गया है। गोवंश संरक्षण के इस सेवा कार्य को आगे बढ़ाने में संत समाज का सहयोग अपेक्षित है। यह सर्वथा उचित होगा कि सभी आश्रमों में गोवंश संरक्षण स्थल का विकास हो। हर आश्रम में गोसेवा हो। महाकुंभ में सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने सभी संतों-संन्यासियों, आचार्यों से अनुरोध किया कि अपने आश्रम में तब तक किसी को प्रवास की अनुमति न दें, जब तक कि उनका विधिवत सत्यापन न कर लिया जाए।


