स्विट्जरलैंड का बड़ा फैसला: भारत से छीना MFN दर्जा, कंपनियों को 10% ज्यादा देना होगा टैक्स

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स्विट्जरलैंड ने भारत को दिए गए मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा वापस लेने का फैसला किया है। स्विट्जरलैंड सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, आगामी एक जनवरी से यह फैसला लागू होगा। इस फैसले का असर यह होगा कि स्विट्जरलैंड व यूरोपीय यूनियन में काम करने वाली भारतीय कंपनियों को वहां होने वाली कमाई पर पहले की तुलना में ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा। इसका अर्थ यह है कि स्विट्जरलैंड एक जनवरी, 2025 से भारतीय कंपनियों द्वारा उसके यहां होने वाली कमाई पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाएगा।

क्या होता है मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN)

संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की एक संस्था वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) है। 164 देश इसके सदस्य हैं। इसके तहत आने वाले सभी देश एक दूसरे को मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा देते हैं। यह दर्जा दिए जाने के बाद बिना किसी भेदभाव के सभी देश एक दूसरे के साथ आसानी से बिजनेस कर सकते हैं।

मोस्ट फेवर्ड नेशन के फायदे

1. देश आपस में कम सीमा शुल्क या बिना शुल्क एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट को बढ़ावा देते हैं।

2. सदस्य देश बाकी देशों की कंपनी को लाइसेंस प्रक्रिया में भी छूट देते हैं।

3. विकासशील या गरीब देशों को दूसरे देश के बाजार में आसानी से पहुंच मिलती है।

4. सभी देश किसी भी देश के साथ बिजनेस के लिहाज से भेदभाव नहीं कर सकते।

इस वजह से लिया फैसला

स्विट्जरलैंड ने डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत भारत को MNF राष्ट्र का दर्जा दिया था। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड की तरफ से कहा गया भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से उसे यह कदम उठाना पड़ा है। दरअसल पिछले साल नेस्ले से संबंधित एक मामले में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि DTAA तब तक लागू नहीं किया जा सकता है जब तक कि इसे इनकम टैक्स एक्ट के तरह नोटिफाई न किया जाए।

इस फैसले का मतलब था कि नेस्ले जैसी कंपनियों को अपने लाभांश पर ज्यादा टैक्स देना होगा। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि विदेशी संस्थाओं में या उनके लिए काम करने वाली कंपनियों और व्यक्तियों को डबल टैक्स न देना पड़े। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। बता दें कि नेस्ले स्विट्जरलैंड की कंपनी है। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के वेवे शहर में है।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा था हाई कोर्ट का फैसला

बयान के अनुसार, 2021 में नेस्ले मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहरे टैक्स से बचाव समझौते में MFN खंड को ध्यान में रखते हुए टैक्स को बरकरार रखा था। हालांकि, भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने 19 अक्टूबर, 2023 के एक फैसले में लोअर कोर्ट के फैसले को पलट दिया और निष्कर्ष निकाला कि एमएफएन खंड की प्रयोज्यता “आयकर अधिनियम की धारा 90 के अनुसार ‘अभिसूचना’ के अभाव में सीधे लागू नहीं थी।“

स्विस प्राधिकरण के फैसले पर टिप्पणी करते हुए नांगिया एंडरसन एमएंडए टैक्स पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने कहा कि भारत के साथ अपनी टैक्स समझौते के तहत एमएफएन खंड के आवेदन का एक तरफा निलंबन द्विपक्षीय संधि की गतिशीलता में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस निलंबन से स्विट्जरलैंड में काम करने वाली भारतीय संस्थाओं के लिए टैक्स देनदारियों में वृद्धि हो सकती है, जो एक उभरते वैश्विक परिदृश्य में अंतर्राष्ट्रीय टैक्स समझौता को नेविगेट करने की जटिलताओं को उजागर करता है।

क्या होता है डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA)

क्लियर टैक्स के मुताबिक, दो देश अपने नागरिकों और कंपनियों को डबल टैक्स से बचाने के लिए आपस में डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) करते हैं। इसके तहत कंपनियों या व्यक्तियों को उनकी सेवाओं या प्रोडक्ट के लिए दो अलग देशों में टैक्स नहीं देना पड़ता।

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क्यों और कैसे छीना जाता है MFN का दर्जा

सामान्य तौर पर WTO के आर्टिकल 21बी के तहत कोई भी देश सुरक्षा संबंधी विवादों के चलते दूसरे देश से यह दर्जा वापस ले सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे वापस लेने के लिए कई मुख्य शर्तें पूरी करनी होती हैं पर असल में इसे हटाने को लेकर कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। यह बात भी साफ नहीं है कि अगर कोई देश MFE का दर्जा किसी देश से छीन रहा है, तो वह WTO को सूचित करने के लिए बाध्य है या नहीं।

2019 में भारत ने पाकिस्तान से छीना था का दर्जा

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 2019 को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने भी पाकिस्तान से MFN का दर्जा छीन लिया था। जिसके तहत पाकिस्तान से आयात होने वाली कई चीजों पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया था।

आइए कुछ बिंदुओं में जानते हैं WTO के बारे में…

1. यूनाइटेड नेशन ने 30 अक्टूबर 1947 को GATT (जनरल एग्रीमेंट ऑन टैरिफ एंड ट्रेड) बनाया था।

2. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया भर के देशों के बीच बिजनेस में सहयोग के लिए इसे बनाया गया।

3. 1 जनवरी 1995 को GATT की जगह वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) की स्थापना की गई।

4. अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, भारत, पाकिस्तान समेत 74 देश WTO के शुरुआती सदस्य थे।

5. WTO के सदस्य देशों ने बिजनेस में सहयोग के लिए एक-दूसरे को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया था।

6. भारत ने अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान को यह दर्जा 1996 में दिया था।

कैसा है भारत-स्विट्जरलैंड के बीच व्यावसायिक संबंध

1. भारत एशिया में स्विट्जरलैंड का चौथा सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है।

2. स्विट्जरलैंड में लगभग 100 भारतीय कंपनियां हैं।

3. 2021-22 में दोनों का बाइलैटरल ट्रेड 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा था।4. भारत से एक्सपोर्ट- केमिकल, मोती, कीमती पत्थर और ज्वेलरी।

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