
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को पोलैंड पहुंच चुके हैं। चार दशक से भी अधिक समय में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। पोलैंड की यात्रा करने वाले आखिरी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई थे जिन्होंने 1979 में पोलैंड की यात्रा की थी। 23 अगस्त को पीएम मोदी यूक्रेन में होंगे।
भारत की विदेश नीति स्वतंत्र
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में कई तरह की खबरें आई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि यह यात्रा पश्चिमी देशों के दबाव में हो रही है लेकिन विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) तन्मय लाल ने कहा है कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है, हर देश से स्वतंत्र संबंध हैं।
अटकलें यह भी है कि क्या पीएम मोदी की यूक्रेन यात्रा को लेकर रूस असहज होगा! जानकार कहते हैं कि हो सकता है कि ऐसा हो, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब चीन जाते हैं तो क्या भारत असहज नहीं होता है? इसलिए हर देश अपनी विदेश नीति को ध्यान में रख अपने लाभ के लिए काम करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते और पिछले माह पीएम मोदी की रूस यात्रा के चलते कई कयास लगाए जा रहे हैं। यह कहा जा रहा कि वह शांति का फॉर्मूला लेकर गए हैं लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी की यात्रा यूरोप के बड़े देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसे युद्ध रोकने के परिप्रेक्ष्य में देखना ठीक नहीं होगा।
यूक्रेन में प्रधानमंत्री की पहली यात्रा
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर संजय पांडे कहते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध तभी रुक सकता है जब पश्चिमी देश चाहेंगे या रूस खुद चाहेगा। भारत और चीन जैसे देशों की उसमें कोई ठोस भूमिका नहीं है। यह जरूर है कि भारत शांति और कूटनीति से समाधान पर जोर दे रहा है। यह भी तय है कि प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेन को सलाह देंगे कि वह शांति वार्ता की पहल करे लेकिन इससे कुछ नहीं होगा। जब तक पश्चिमी देश नहीं चाहेंगे तब तक यूक्रेन पीछे नहीं हटेगा। पोलैंड और यूक्रेन दोनों भारत के लिए महत्वपूर्ण देश हैं लेकिन यूक्रेन में प्रधानमंत्री की पहली यात्रा हो रही है। जबकि यूक्रेन पूर्वी यूरोप का रूस के बाद दूसरा बड़ा देश है। भारत की प्रगाढ़ता यूरोप के चार-पांच प्रमुख देशों से रही है। आज भारत का प्रयास सभी देशों के साथ अपनी कूटनीति पहुंच को बढ़ाना है।
भारत के लिए महत्वपूर्ण है पोलैंड
भारत और पोलैंड के बीच 1954 में राजनीतिक संबंध स्थापित हुए थे। राजनीति के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर पोलैंड से भारत का जुड़ाव काफी महत्वपूर्ण रहा है। 2004 में यूरोपीय संघ में शामिल होने के बाद मध्य यूरोप में पोलैंड भारत का प्रमुख आर्थिक भागीदार बन गया। पोलैंड में करीब 25 हजार भारतीय रहते हैं। इनमें करीब पांच हजार भारतीय छात्र पोलैंड में पढ़ाई कर रहे हैं और एक हजार के करीब भारतीय रेस्टोरेंट हैं। भारत और पोलैंड के बीच बीते 10 सालों में कुल कारोबार में 192 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। 2023 में दोनों देशों के बीच करीब 48 हजार करोड़ रूपये का व्यापार हुआ। 2023 में भारत ने पोलैंड के साथ 33 हजार 146 करोड़ का निर्यात और 14 हजार 770 करोड़ का आयात किया था।
उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद और नस्लवाद पर दोनों देशों की विचारधाराएं समान हैं। भारत और पोलैंड ने कठोर मुद्रा व्यापार व्यवस्थाओं में बदलाव किया, जिससे व्यापार में वृद्धि हुई। अगले साल पोलैंड यूरोपियन यूनियन काउंसिल का अध्यक्ष बनने वाला है। इसलिए भी पोलैंड संग संबंध भारत के लिए जरूरी है। रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने में पोलैंड ने मदद की थी।


