
Indian Railway की सहायक कंपनी IRCTC (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) ने अपनी प्राइवेट ट्रेनों की देरी पर यात्रियों को हर्जाना देने की योजना को बंद कर दिया है। यह खुलासा सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दिए गए जवाब में हुआ।
पांच साल पहले शुरू हुई थी हर्जाना योजना
IRCTC ने अक्टूबर 2019 में यह योजना शुरू की थी, जिसके तहत तेजस एक्सप्रेस जैसी प्राइवेट ट्रेनों में देरी होने पर यात्रियों को 100 से 250 रुपये तक का हर्जाना दिया जाता था। लेकिन यह योजना 15 फरवरी 2024 को बंद कर दी गई।
गोपनीयता नीति का हवाला
RTI में पूछे गए सवालों पर IRCTC ने गोपनीयता नीति का हवाला देते हुए इस योजना को बंद करने के कारणों का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
कितने रुपये का हर्जाना दिया गया?
IRCTC के आंकड़ों के मुताबिक:
- 2019-20: ₹1.78 लाख
- 2020-21: ₹0 (कोविड महामारी के कारण)
- 2021-22: ₹96,000
- 2022-23: ₹7.74 लाख
- 2023-24: ₹15.65 लाख
पांच सालों में कुल 26 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर यात्रियों को दिए गए।
हर्जाना देने का उद्देश्य
IRCTC ने तेजस एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रियों को आकर्षित करने के लिए इस योजना को शुरू किया था। यह एक प्रकार की मार्केटिंग रणनीति थी ताकि यात्रियों का भरोसा बढ़ाया जा सके।
हर्जाने की शर्तें
- 60 से 120 मिनट की देरी पर ₹100
- 120 से 240 मिनट की देरी पर ₹250
- ट्रेन रद्द होने की स्थिति में पूरा किराया वापस किया जाता था।
तेजस एक्सप्रेस के बारे में
IRCTC वर्तमान में दो तेजस ट्रेनों का संचालन करता है:
- नई दिल्ली-लखनऊ (अक्टूबर 2019 से)
- अहमदाबाद-मुंबई (जनवरी 2020 से)
योजना बंद होने से यात्रियों को अब देरी की स्थिति में केवल खानपान सुविधा का लाभ मिलेगा, लेकिन हर्जाना नहीं।
यह कदम यात्रियों के अनुभव पर क्या प्रभाव डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।


