
आइपीओ के आकार के हिसाब से निवेश करने पर आपको घाटा उठाना पड़ सकता है। यह बात आम निवेशकों को निश्चित तौर पर समझने की जरूरत है क्योंकि देश की सबसे बड़ी कार कंपनी हुंडई मोटर इंडिया पहली बार शेयर बाजार में उतरने जा रही है।
बाजार में एक बार फिर से सबसे बड़े आइपीओ का दावा किया जा रहा है। देश का सबसे बड़ा आइपीओ 15 अक्तूबर (मंगलवार) से खुल जाएगा। निवेशक 17 अक्तूबर तक इसके लिए बोली लगा सकेंगे। देश में इससे पहले आए बड़े आइपीओ में से ज्यादातर की स्थिति अच्छी नहीं है। सिर्फ एक आइपीओ का अच्छा रिटर्न दिया है।
सतर्कता बरतें निवेशक
हुंडई का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आइपीओ) 15 को खुलेगा। कंपनी की तरफ से जो सूचनाएं दी गई हैं उसके मुताबिक इसका आकार 27,870 करोड़ रुपये का हो सकता है। निश्चित तौर पर हुंडई अभी दुनिया की तीसरी सबसे बड़े कार बाजार ‘भारत’ की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है।
भारत में इसकी दीर्घकालिक रणनीति है। इसके बावजूद यह बात याद रखनी चाहिए कि पूर्व में डीएलएफ लिमिटेड, रिलायंस पावर, पेटीएम जैसी कंपनियों ने अपने-अपने आइपीओ की देश के सबसे बड़े निर्गम के तौर पर मार्केटिंग की लेकिन इससे ग्राहकों को नुकसान हुआ।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या हुंडई का आइपीओ निवेशकों को फायदा देगा? हालांकि ग्रे मार्केट में अनुमान के मुताबित, अभी इसकी लिस्टिंग कमजोर दिखाई दे रही है। लेकिन लिस्टिंग के बाद यह निवेशकों को कितना फायदा देगा अभी इसके बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
ब्रोकरेज कंपनियों ने लंबी अवधि के निवेश की दी है सलाह
आइसीआइसीआइ डायरेक्ट, आनंद राठी, बजाज ब्रोकरेज, आदित्य बिरला कैपिटल, एसबीआइ सिक्यूरिटीज जैसी एक दर्जन ब्रोकरेज कंपनियों ने अपनी अपनी रिपोर्ट में हुंडई की आइपीओ को लंबी अवधि के हिसाब से निवेश करने की सलाह दी है।
आइए जानते हैं 6 बड़े आइपीओ की स्थिति…
- डीएलएफसे निवेशकों को मिली मायूसी
सबसे बड़े आइपीओ के तौर पर वर्ष 2007 में रियल एस्टेट की प्रसिद्ध कंपनी डीएलएफ ने अपने निर्गम की ब्रांडिंग की। इसके आइपीओ का आकार 9,187 करोड़ रुपये का था। वैसे यह इश्यू तकरीबन साढ़े तीन गुणा ओवरसब्सक्राइब हुआ था, लेकिन खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित शेयरों के प्रति खास उत्साह नहीं दिखा था। आइपीओ का मूल्य 525 रुपये प्रति शेयर तय किया गया। तकरीबन पांच वर्ष बाद कंपनी ने 600 रुपये प्रति शेयर की दर से बायबैक का फैसला किया।
डीएलएफ ने वर्ष 2008 में करीब 1200 रुपये का अपना ऑलटाइम हाई बनाया। लेकिन, 16 साल बीतने के बावजूद दोबारा कभी उस स्तर पर नहीं पहुंच पाई। फिलहाल डीएलएफ के शेयर 850 रुपये के आसपास कारोबार कर रहे हैं।
2. रिलायंस पावर का भी हुआ बुरा हाल
अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी की रिलायंस पावर साल 2008 में 11,563 करोड़ रुपये मूल्य का आइपीओ आया। इसे भी कंपनी ने देश के सबसे बड़े आइपीओ के तौर पर प्रचारित किया। इश्यू (निर्गम) 72 गुणा सब्सक्राइब हुआ। खुदरा निवेशकों के लिए शेयर कीमत 430 रुपये प्रति शेयर निर्धारित की गई थी।
लेकिन रिलायंस पावर की शेयर मार्केट में एंट्री बेहद खराब रही। यह कभी अपने इश्यू प्राइस तक भी नहीं पहुंच पाई। अभी भी रिलांयस पावर की स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं है। यह कई तरह के कानूनी विवादों में फंसी हुई है। इसका शेयर साल 2020 में घटकर 1 रुपये तक आ गया था। पिछले हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन इसकी कीमत 44.23 रुपये प्रति शेयर थी।
3. पेटीएम ने भी किया कंगाल
घरेलू फिनटेक कंपनी पेटीएम के आइपीओ की भी काफी ज्यादा चर्चा थी। इसका आइपीओ 2021 में 2,150 रुपये प्राइस पर आया था। पेटीएम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना था कि वे अपने शेयर की इश्यू प्राइस और भी अधिक रख सकते थे। लेकिन वे चाहते थे कि आइपीओ निवेशक भी कुछ पैसे कमा लें। लेकिन पेटीम की शेयर मार्केट में एंट्री 9 फीसदी डिस्काउंट के साथ हुई। लिस्टिंग के दिन और गिरावट आई और यह 1,564 पर बंद हुआ।
यह मई 2024 में गिरकर 310 रुपये के निचले स्तर तक आ गया था। हालांकि, वहां से इसने बाउंस बैक किया और अभी 700 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि, अपनी लिस्टिंग प्राइस तक पहुंचने के लिए भी अभी इसे दोगुना सफर तय करना है।
4. एलआईसी ने किया निवेशकों का नुकसान
इसका आइपीओ मई 2022 में आया था। इस आइपीओ का इश्यू साइज 20,557 करोड़ रुपये था। आइपीओ के समय इसका प्राइज 949 रुपये था। यह आइपीओ 8.62 फीसदी की गिरावट के साथ 867.20 पर लिस्ट हुआ था। लिस्टिंग के बाद इसमें और गिरावट आती गई। नवंबर 2023 से इसमें कुछ बढ़त देखने को मिली।
अभी इसके शेयर की कीमत 959.85 रुपये है। इसके इश्यू प्राइज से लेकर अब तक इसमें करीब 16 फीसदी का इजाफा हुआ है। पॉजिटिव रिटर्न के बाद भी इस शेयर ने एक तरह से निवेशकों का नुकसान ही किया है।
5. एसबीआई कार्ड्स ने भी किया निराश
यह आइपीओ मई 2020 में आया था। इसका इश्यू साइज 10,341 करोड़ रुपये था। इसके एक शेयर की कीमत 755 रुपये थी। इसकी भी लिस्टिंग निराशाजनक रही थी। यह 12.85 फीसदी के डिस्काउंट के साथ 658 रुपये पर लिस्ट हुआ था।
अभी इसके शेयर की कीमत 737 रुपये है यानी इश्यू प्राइज से नीचे। लिस्टिंग से लेकर अभी तक इसके शेयर में 28 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। सोमवार को इसके शेयर में कुछ तेजी देखी गई।
6. सिर्फ कोल इंडिया है अपवाद
सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया का आइपीओ साल 2010 में आया। वैसे यह आइपीओ सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा था। इश्यू साइज 15,200 करोड़ रुपये था। आइपीओ 15 गुणा सब्सक्राइब हुआ और 245 रुपये का शेयर 287.75 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ। अभी इसके शेयरों का भाव 500 रुपये के करीब है।
पिछले शुक्रवार को इसके शेयरों के भाव 493.10 रुपये प्रति शेयर था।हालांकि, पिछले 14 वर्षों के अंतराल और भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार को देखते हुए इसे रिटर्न के हिसाब से बहुत आकर्षक नहीं कहा जा सकता है।
स्वास्तिका इन्वेस्टमेंट लिमिटेड में रिसर्च हेड संतोष मीणा ने कहा, “हुंडई के आइपीओ को लेकर निवेशकों में वैसे ही उत्साह होगा जैसा दो दशक पहले मारुति सुजुकी के आइपीओ में देखा गया था। समस्या यह है कि कई बड़े आइपीओ आ चुके हैं और निवेशकों को यह फैसला करना होगा कि कहां रहना है और कहां से हटना है।”


