
कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर से दरिंदगी के मामले में 14 घंटे की देरी से एफआईआर दर्ज करने पर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को सवालों में घेरा। कोर्ट ने पूछा की एफआईआर दर्ज करने में 14 घंटे की देरी क्यों हुई। शीर्ष अदालत ने पुलिस की जनरल डायरी एंट्री, अप्राक्रतिक मौत की प्रविष्टि और एफआईआर दर्ज करने के समय में विसंगतियों पर बंगाल सरकार पर प्रश्नों की बौछार करते हुए गंभीर मामला करार दिया। अगली सुनवाई पांच सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले को स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट और बंगाल सरकार की ओर से दिये गए दस्तावेज़ देखे। कोर्ट ने पुलिस रिकार्ड और पुलिस कार्यवाई की विसंगतियों पर ममता सरकार को घेरा। कोर्ट ने कहा की पोस्टमार्टेम होने के बाद अप्राक्रतिक मौत की एफआईआर हुई जबकि पोस्टमार्टम होता है तो इसका मतलब है की अप्राक्रतिक मौत हुई है। तो फिर अप्राक्रतिक मौत की एंट्री उसके बाद कैसे की गई। पुलिस ने जो प्रक्रिया अपनाई है वह आपराधिक कानून में नहीं होती। जस्टिस पार्डीवाला ने कहा की उन्होने 30 वर्ष के करियर में ऐसा नहीं देखा। बंगाल सरकार के वकील कपिल सिब्बल निरुत्तर दिखे। उनके जवाब नहीं दे पाने पर कोर्ट ने कहा अगली बार किसी जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को मौजूद रहने के लिए कहें ताकि वो सवालों के जवाब दे सकें।
दूसरी ओर सीबीआई की ओर से सलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बंगाल पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होने कहा कि सीबीआई पांच दिन बाद जांच के लिए पहुंची थी और तब तक घटनास्थल बदला जा चुका था। दरिंदगी कि शिकार बनी डॉक्टर के मता-पिता को पहले अत्महत्या बताई गई फिर शव दिखाने में देरी कि गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि शव माता-पिता को सौंपने और अंतिम संस्कार होने के बाद एफआईआर रात 11.45 पर दर्ज हुई। सीबीआई की प्रगति रिपोर्ट में बताया गया है की गिरफ्तार किए गए एकमात्र अभियुक्त के पालीग्राफी टेस्ट के लिए सियालदह के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के समक्ष अर्जी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एसीजेएम शुक्रवार शाम पांच बजे तक अर्जी पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने एक बार फिर अस्पताल के प्रिंसिपल पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा कि प्रिंसिपल ने तुरंत एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई। एफआईआर दर्ज करने में 14 घंटे कि देरी क्यों हुई। पीठ ने जब अदालत में मौजूद सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी से उसकी स्थिति रिपोर्ट में दर्ज समय के बारें में सवाल किया तो सीबीआई ने बताया कि जो केस डायरी स्थानीय पुलिस नें उन्हें सौंपी है उसी के आधार पर स्थिति रिपोर्ट में अप्राक्रतिक मौत कि पृविष्टि और एफआईआर आदि का समय दिया गया है। दूसरी ओर बंगाल सरकार कि ओर से पेश कपिल सिब्बल ने बार-बार कहा कि टाइम लाइन दी गई है कोर्ट उसे देख सकता है।
घटना के विरोध और डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताली डॉक्टरों की ओर से उनके विरुद्ध कार्यवाई किए जाने की शिकायतें की गई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अनुरोध किया कि वे काम पर लौटें। कोर्ट ने कहा की डॉक्टर अगर काम पर नहीं लौटेंगे तो स्वास्थ्य सेवाएं कैसे चलेंगी।


