यूपी में माध्यमिक शिक्षा के हजारों शिक्षकों पर लटकी नौकरी जाने की तलवार

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उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग (Uttar Pradesh Secondary School) में जहां एक तरफ से खुशी तो वहीं दूसरी गम की भी स्थिति बनी हुई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में जल्द ही निकलने वाली भर्ती से जहां अभ्यर्थी खुश है तो वहीं सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक आदेश से इस स्कूलों में वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों के ऊपर संकट भी आ गया है। जी हां, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक आदेश के बाद अब प्रदेश के हजारों शिक्षक परेशान है। शिक्षकों का गम इस तरह है कि अब उनकी रातें नहीं कट रही है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक आदेश ने अब उनकी वर्षों की नौकरी पर संकट खड़ा कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपनी स्पेशल पावर का प्रयोग करते हुए यूपी में  माध्यमिक शिक्षा 2000 के बाद मैनेजमेंट कोटे से नियुक्त सभी शिक्षकों की भर्ती रद्द कर दी है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने माध्यमिक शिक्षा विभाग (Madhyamik shiksha) में मैनेजमेंट कोटे (Management Quota) से नियुक्ति पर बड़ा फैसला सुनाया है। इससे अब तदर्थ शिक्षकों के भविष्य पर सभी संकट खड़ा हो गया है।

तदर्थ शिक्षकों को लेकर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 2000 के बाद से अब तक मैनेजमेंट कोटे से नियुक्त हुए सभी शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला अपनी स्पेशल पावर (Special power) का इस्तेमाल करते हुए सुनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) को मिली स्पेशल पावर एक संवैधानिक शक्ति है, जिसे निरस्त नहीं किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों (Uttar Pradesh Secondary School) में समय पर भर्ती न हो पाने के संबंध में संजय सिंह सहित अन्य लोगों की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश संजय किशन कौल और केएम जोजफ की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 में दी गई असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह फैसला सुनाया है। कोर्ट (Supreme Court) ने उन्होंने शिक्षकों के खाली पदों पर शीघ्र परीक्षा आयोजित कर उन्हें भरने को कहा है। अब तदर्थ शिक्षकों की पुरानी सर्विस का सत्यापन कराने का जिम्मा उत्तर प्रदेश की सरकार (Uttar Pradesh Government)  को दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि छात्रों का हित भी बहुत जरूरी है। ऐसे में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या होना जरूरी है, इसलिए जुलाई 2021 से पहले हर हाल में खाली पदों पर भर्ती कर ली जाए। इस संबंध में उत्तर प्रदेश में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) आराधना शुक्ला ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आने वाले फैसले का अध्ययन करने के बाद ही उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। 

अब खुशी और गम में कट रही रातें

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का आदेश आते ही अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में तैनात हजारों शिक्षकों के दिन-रात बहुत ही मुश्किल से कट रहे हैं। उन्हें पता है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला अब तकदीर की नई इबारत लिखेगा। भर्ती रद्द करने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने परीक्षा कराए जाने का आदेश दिया है। इस तरह से अब उन्हें नए सिरे से परीक्षा देनी होगी। जो अध्यापक उसमें सफल होगा उसकी नौकरी पूरी तरह से पक्की हो जाएगी और बाकी बाहर हो जाएंगे। वहीं, छात्रों के लिए यह खुशी की बात है कि ताजा आदेश में यह भी है कि जिले के स्कूलों में जो पद रिक्त हैं अब वे भी भरे जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की तरफ से दिए गए आदेश में सिर्फ माध्यमिक शिक्षा (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) से संबंधित स्कूल ही नहीं बल्कि अल्पसंख्यक संस्थाएं भी इसमें शामिल है। 

फिलहाल कोर्ट ने इतनी दी राहत

अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आदेश दिया है कि वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे तदर्थ शिक्षक पक्का होने के लिए नौकरी देंगे। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की तरफ से जारी आदेश के अनुसार अब इन शिक्षकों की परीक्षा देनी होगी, हालांकि कोर्ट ने इस कोटे (Supreme Court) से नौकरी पाए शिक्षकों को राहत देने का विकल्प सरकार को दिया है। सरकार अब पहले से नियुक्त लोगों को उम्र और मेरिट में छूट दे सकती है। वहीं, इस प्रकिया में जब तक भर्ती (Management Quota) नहीं पूरी हो जाती तब तक उन्हें पूरा वेतन दिया जाएगा। 

बता दें, मैनेजमेंट कोटे (Management Quota)  से स्कूलों (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में होने वाली भर्तियों में जमकर धांधली हुई थी, इसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है। प्रबंधतंत्र (Management Quota) की तरफ से भर्ती किए जाने से प्रतिभाओं को नौकरी का अवसर नहीं मिल पा रहा था। वहीं, प्रबंधतंत्र (Management Quota) अपने रिश्तेदारों की विद्यालयों में भर्ती कर ले रहा था। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जुलाई 2021 तक पदों को भरने के आदेश जारी किए गए हैं। इसमें तदर्थ शिक्षकों को भर्ती (Uttar Pradesh Secondary Eduction Depertment) में वरीयता मिलेगी। यदि सफल हुए तो उनकी पुरानी सेवा को भी जोड़ा जाएगा।

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